छत्तीसगढ़ में 'ब्लैकआउट' का खतरा! 22 जून से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर जा रहे विद्युत संविदा कर्मचारी

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22 जून से अनिश्चितकालीन आंदोलन | विद्युत संविदा कर्मचारी | नियमितीकरण की मांग
घरघोड़ा/रायगढ़। बिजली संकट

छत्तीसगढ़ में 'ब्लैकआउट' का खतरा! 22 जून से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर जा रहे विद्युत संविदा कर्मचारी

घरघोड़ा/रायगढ़: 8-10 साल से सेवा दे रहे लाइन परिचारकों की नियमितीकरण की मांग, 5000+ पद रिक्त।

⚠️ बिजली व्यवस्था पर मंडराया संकट

छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। प्रदेश के विद्युत लाइन परिचारक संविदा कर्मचारी अपनी नियमितीकरण की मांग को लेकर आगामी 22 जून 2026 से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर जाने की तैयारी कर चुके हैं। इस बड़े आंदोलन के मद्देनजर कर्मचारियों द्वारा व्यापक स्तर पर सूचना और पोस्टर अभियान चलाया जा रहा है।

घरघोड़ा-तमनार में सौंपा ज्ञापन

इसी कड़ी में आज रायगढ़ जिले के घरघोड़ा उपसंभाग और तमनार वितरण केंद्र के विद्युत संविदा कर्मचारियों ने कनिष्ठ यंत्री (Junior Engineer) श्री तरुण जायसवाल को अपनी मांगों के संबंध में एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन और पोस्टर कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित:

  • श्री नंद कुमार मरकाम (अध्यक्ष, रायगढ़ रीजन)
  • गिरधर सिंह कंवर, लक्ष्मी लटिया
  • राजेश सिंह, राजेश चंद्रा
  • मनेश राम, दीपक साव
  • राजकुमार खुटे और पारस पटेल
"हमें विभाग की सेवा करते हुए 8 से 10 वर्ष का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन प्रबंधन ने हमारी जायज मांगों पर अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया है। जब विभाग पूर्व में वर्ष 2007, 2010 और 2015 में संविदा कर्मचारियों को नियमित कर चुका है, तो फिर हमारे साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?"
- नंद कुमार मरकाम, अध्यक्ष (रायगढ़ रीजन) - N.K. संगवारी रिपोर्ट

कर्मचारियों की मुख्य शिकायतें और जमीनी हकीकत

  • रिक्त पदों की संख्या: विभाग में इस समय 5,000 से अधिक पद रिक्त हैं, इसके बावजूद संविदा कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा रहा है।
  • जोखिम भरा और स्थायी कार्य: कर्मचारियों का कहना है कि उनसे बिजली विभाग के सभी स्थायी और अत्यधिक जोखिम भरे कार्य लिए जाते हैं, लेकिन इसके एवज में उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा लाभ शून्य हैं।
  • आर-पार की लड़ाई की चेतावनी: कर्मचारियों ने साफ किया है कि यदि विभाग ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर पर उग्र और पुरजोर आंदोलन किया जाएगा।

क्या छत्तीसगढ़ में पैदा होगी 'ब्लैकआउट' की स्थिति?

विद्युत सेवा को 'अति आवश्यक सेवा' (Essential Service) के दायरे में रखा जाता है। ऐसे में 22 जून से होने वाले इस अनिश्चितकालीन आंदोलन के कारण यदि बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा आती है या फॉल्ट सुधरने में देरी होती है, तो पूरे प्रदेश में 'ब्लैकआउट' की स्थिति निर्मित हो सकती है

कर्मचारियों ने अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी किसी भी अप्रिय स्थिति या अव्यवस्था की संपूर्ण जिम्मेदारी स्वयं विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।

अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इन संविदा कर्मचारियों की मांगों को समय रहते पूरा करता है या फिर छत्तीसगढ़ की जनता को इस आंदोलन के कारण बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा।

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