छत्तीसगढ़ में बिजली संकट का खतरा! कुल स्वीकृत पदों में से 50% से अधिक पद खाली, अभियंता संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में आने वाले समय में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। राज्य विद्युत वितरण कंपनी में तकनीकी (लाइन) कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मैदानी कार्यों का निष्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर 'छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ' ने सूबे के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने की गुहार लगाई है।
अभियंता संघ का कहना है कि यदि इस समस्या का तुरंत निराकरण नहीं किया गया, तो राज्य की विद्युत वितरण व्यवस्था पर इसका बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
आंकड़ों की जुबानी: आधे से ज्यादा पद खाली
संघ द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्वीकृत पदों और वर्तमान स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है:
- कुल स्वीकृत पद (लाइन स्टाफ): 12,317
- वर्तमान में कार्यरत नियमित कर्मचारी: केवल 5,747
- कुल रिक्त पद: 6,570
- बिजली सुधार कार्यों में देरी: लाइन फॉल्ट और ब्रेकडाउन की स्थिति में सुधार कार्यों में अत्यधिक समय लग रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
- हादसों का खतरा: सीमित कर्मचारियों पर काम का दबाव इतना ज्यादा है कि कार्य की गुणवत्ता और फील्ड स्टाफ की सुरक्षा दांव पर लगी है। काम के बोझ के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
- रखरखाव ठप: बिजली लाइनों और सब-स्टेशनों का आवश्यक संधारण व रखरखाव (Maintenance) समय पर नहीं हो पा रहा है, जिससे विभाग और शासन की छवि धूमिल हो रही है।
- सरकारी शिविर प्रभावित: शासन द्वारा आयोजित होने वाले विभिन्न शिविरों और जनसमस्या निवारण कार्यक्रमों में समयबद्ध तरीके से काम पूरा नहीं हो पा रहा है।
- हाई-टेक योजनाएं अधर में: पर्याप्त फील्ड स्टाफ न होने के कारण सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जैसे स्मार्ट मीटरिंग कार्य, उनका इंस्टॉलेशन, मॉनिटरिंग और E-SEAM जैसी डिजिटल सेवाओं का प्रभावी संचालन करना बेहद कठिन हो गया है।
चौंकाने वाली बात: आंकड़ों के लिहाज से देखें तो तकनीकी कर्मचारियों के 50 प्रतिशत से भी अधिक पद वर्तमान में खाली पड़े हैं, जिसके कारण सीमित नियमित कर्मचारियों पर काम का अत्यधिक बोझ बढ़ गया है।
स्टाफ की कमी से खड़ी हो रही हैं ये 5 बड़ी समस्याएं
पत्रोपाधि अभियंता संघ ने मुख्यमंत्री का ध्यान उन जमीनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया है, जो इस स्टाफ की कमी के कारण पैदा हो रही हैं:
संविदा कर्मियों से कार्य कराने की बाध्यता, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन और इंजीनियरों पर तनाव
संघ ने एक बेहद संवेदनशील कानूनी और सुरक्षा संबंधी मुद्दे को भी उठाया है। पत्र में कहा गया है कि नियमित तकनीकी कर्मचारियों के अभाव में कई स्थानों पर संविदा विद्युत कर्मचारियों से विद्युत पोल पर चढ़ाकर काम कराया जा रहा है, जो कि मैदानी स्तर पर एक बेहद बाध्यकारी स्थिति बन चुकी है।
नियमानुसार इन संविदा कर्मचारियों को पोल पर चढ़कर इस तरह के कार्य करने की पात्रता (परमिशन) नहीं है। ऐसी स्थिति में यदि मैदानी स्तर पर कोई अप्रिय दुर्घटना होती है, तो उसके लिए अभियंताओं (इंजीनियरों) को उत्तरदायी ठहराया जाता है, जो कि पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
संघ की प्रमुख मांग
प्रांतीय अध्यक्ष इंजी. श्रीकांत बड़गैया और प्रांतीय महासचिव इंजी. दीपक कुमार निकुंज के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में मुख्यमंत्री से विनम्र निवेदन किया गया है कि विद्युत सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी कर्मचारियों के इन 6,570 रिक्त पदों को शीघ्र अति शीघ्र भरा जाए।


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