बिजली निजीकरण पर केंद्र का अल्टीमेटम: छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने चुना 'शेयर बाजार में लिस्टिंग' का रास्ता; क्या निजीकरण से बच गया विभाग?
NK Sangwari विशेष रिपोर्ट: बिजली निजीकरण का 'चौंकाने वाला' मोड़! क्या छत्तीसगढ़ बच गया? रायपुर/नई दिल्ली। केंद्र सरकार के विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 के दबाव में राज्यों की स्थिति 'करो या मरो' वाली हो गई है। केंद्र का सीधा अल्टीमेटम है— निजीकरण के तीन विकल्पों में से एक चुनो , अन्यथा केंद्रीय ग्रांट (आर्थिक सहायता) हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी। इसी बीच, छत्तीसगढ़ कैबिनेट के 9 जून 2026 के एक चौंकाने वाले निर्णय ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। केंद्र के तीन कड़े विकल्प: क्या है असली जाल? केंद्र सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को सुधारने के नाम पर राज्यों के सामने तीन कठिन विकल्प रखे हैं: विकल्प 1: बिजली कंपनियों की 51% हिस्सेदारी निजी हाथों में बेचना। विकल्प 2: 26% हिस्सेदारी बेचकर प्रबंधन (Management) पूरी तरह से निजी कंपनी को सौंपना। विकल्प 3: अपनी कंपनियों को सेबी (SEBI) और स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (लिस्टेड) कराना। क्या छत्तीसगढ़ का निजीकरण ...