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छत्तीसगढ़ विद्युत विभाग में बढ़ती जा रही है कर्मचारियों की नाराजगी, अब आरक्षित वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संघ ने भी फूंका आंदोलन का बिगुल!

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छत्तीसगढ़ विद्युत विभाग में बढ़ती जा रही है कर्मचारियों की नाराजगी, अब आरक्षित वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संघ ने भी फूंका आंदोलन का बिगुल! रायपुर: छत्तीसगढ़ के ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र में पिछले कुछ समय से कर्मचारी संगठनों का आक्रोश उफान पर है। संविदा कर्मचारी संघ, तकनीकी संघ और भारतीय मजदूर संघ की बढ़ती सक्रियता के बीच, अब 'छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मण्डल आरक्षित वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संघ' ने भी प्रबंधन के खिलाफ सीधे लड़ाई का ऐलान कर दिया है। विभाग की कार्यप्रणाली और लंबित मांगों पर चुप्पी से नाराज संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वार्ता के आश्वासन का समय खत्म हो चुका है। विवाद की जड़: प्रबंधन का 'टालमटोल' रवैया प्रांतीय महासचिव विजय कुमार नाग ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि विवाद की शुरुआत 20 अप्रैल 2026 को हुई थी। उस समय प्रबंधन के साथ एक द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की गई थी। उस बैठक में संघ ने अपनी जायज मांगों को रखा था और प्रबंधन के सकारात्मक आश्वासन पर ही अपने प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय...

​"छत्तीसगढ़ में होगा 'ब्लैकआउट'! बिजली विभाग के खिलाफ संविदा कर्मचारियों का बड़ा ऐलान, 22 जून से आर-पार की लड़ाई!"

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रायगढ़/रायपुर : छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ (722) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। संघ के महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो प्रदेश में ब्लैकआउट (Blackout) की स्थिति पैदा हो सकती है। ​क्या है कर्मचारियों की मुख्य समस्या? ​महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं: ​नियमितीकरण का अभाव : वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य करने के बावजूद, पर्याप्त रिक्त पद होने के बाद भी हजारों संविदा कर्मचारियों को अब तक नियमित नहीं किया गया है। ​परमिट का दबाव: कर्मचारियों को वर्तमान में परमिट लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। भारद्वाज ने सवाल किया कि यदि परमिट के दौरान कोई दुर्घटना होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? ​आंदोलन की रूपरेखा: दो पड़ावों में होगा संघर्ष ​संघ ने प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उनकी मांगों पर त्वरित निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे: ​प्रथम पड़ाव (22 जून 2026 से ): राज्य के सभी क्षेत्रीय/रीजन स्तरीय कार्यालयों में अ...

छत्तीसगढ़ बिजली विभाग में फिर गहराया संकट: और और कर्मचारी संघ ने 17 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल की दी चेतावनी

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  रायपुर : छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी के कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच विवाद एक बार फिर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ-महासंघ ने प्रबंधन पर पूर्व में हुए समझौतों और आश्वासनों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आंदोलन की घोषणा कर दी है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी लंबित मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 17 अगस्त 2026 से प्रदेश भर में 'अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल' शुरू की जाएगी। ​ आंदोलन की रूपरेखा ​संघ ने अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन को तीन चरणों में विभाजित किया है: ​ प्रथम चरण (01 जून से 30 जून 2026): सभी वितरण केंद्रों, ज़ोन और संभागीय स्तर पर जनसंपर्क एवं हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। ​ द्वितीय चरण (01 जुलाई से 09 जुलाई 2026): क्षेत्रीय मुख्यालयों और उत्पादन केंद्रों पर आमसभाएं और प्रदर्शन किए जाएंगे तथा ज्ञापन सौंपा जाएगा। ​ तृतीय चरण (10 जुलाई 2026 ): रायपुर स्थित पावर कंपनी मुख्यालय, डंगनिया के समक्ष एक दिवसीय विशाल आक्रोश प्रदर्शन किया जाएगा। ​ संघ की प्रमुख मांगें ​संघ ने अपनी सात सूत्रीय मांगों का ब्यौरा प्रबंधन को सौंपा है, जिनमें प्रमुख हैं: ​प...