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​"छत्तीसगढ़ में होगा 'ब्लैकआउट'! बिजली विभाग के खिलाफ संविदा कर्मचारियों का बड़ा ऐलान, 22 जून से आर-पार की लड़ाई!"

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रायगढ़/रायपुर : छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ (722) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। संघ के महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो प्रदेश में ब्लैकआउट (Blackout) की स्थिति पैदा हो सकती है। ​क्या है कर्मचारियों की मुख्य समस्या? ​महामंत्री कमलेश भारद्वाज ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं: ​नियमितीकरण का अभाव : वर्षों से अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य करने के बावजूद, पर्याप्त रिक्त पद होने के बाद भी हजारों संविदा कर्मचारियों को अब तक नियमित नहीं किया गया है। ​परमिट का दबाव: कर्मचारियों को वर्तमान में परमिट लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। भारद्वाज ने सवाल किया कि यदि परमिट के दौरान कोई दुर्घटना होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? ​आंदोलन की रूपरेखा: दो पड़ावों में होगा संघर्ष ​संघ ने प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उनकी मांगों पर त्वरित निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे: ​प्रथम पड़ाव (22 जून 2026 से ): राज्य के सभी क्षेत्रीय/रीजन स्तरीय कार्यालयों में अ...

मुनाफे में रहने के बावजूद IMPCL का निजीकरण: क्या सरकारी कंपनियों और विभागों का भविष्य खतरे में है?

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  ​नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएं बनाने वाली अपनी एकमात्र सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी IMPCL (इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड) को निजी हाथों में सौंप दिया है। सरकार ने इस कंपनी को 'मेसर्स स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड' को 121 करोड़ रुपये में बेच दिया है। अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में स्थित यह कंपनी केंद्र के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत थी। ​कंपनी की स्थिति: लगातार मुनाफे में थी IMPCL ​सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कंपनी घाटे में थी? आंकड़ों पर गौर करें तो तस्वीर पूरी तरह अलग है। IMPCL कोई घाटे वाली कंपनी नहीं थी, बल्कि इसने पिछले कुछ वर्षों में असाधारण वृद्धि दर्ज की थी। ​ वित्तीय प्रदर्शन: साल 2019-20 में कंपनी का मुनाफा 45 लाख रुपये था, जो 2021-22 तक बढ़कर 3,376 लाख रुपये के शिखर पर पहुँच गया। यह लगभग 75 गुना की जबरदस्त बढ़ोतरी थी। ​हालिया रुझान : हालांकि पिछले दो वर्षों (2022-23 में 2,081 लाख और 2023-24 में 1,281 लाख रुपये) में मुनाफे में गिरावट देखी गई, लेकिन इसके बावजूद कंपनी निरंतर लाभ ( Profit ) कमा रही थी। ​ निज...

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब योग्यता छिपाकर 'छोटी' नौकरी पाना पड़ेगा भारी, बर्खास्तगी होगी जायज

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  ​नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में भर्ती को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने स्पष्ट किया है कि जिन पदों के लिए अधिकतम शैक्षणिक योग्यता (जैसे 10वीं पास) पहले से निर्धारित है, उन पर उच्च शिक्षित (ग्रेजुएट या पोस्ट-ग्रेजुएट) उम्मीदवारों को नियुक्त नहीं किया जा सकता। ​अदालत ने कहा है कि यदि कोई उम्मीदवार अपनी उच्च शिक्षा की जानकारी छिपाकर कम शैक्षणिक योग्यता वाली नौकरी हासिल करता है, तो यह अनुचित और अवैध है। ​क्या है पूरा मामला? ​यह फैसला एक ऐसे उम्मीदवार से संबंधित है, जिसने स्नातक (ग्रेजुएट) होने के बावजूद अपनी डिग्री छिपाकर बैंक में चतुर्थ श्रेणी (फोर्थ क्लास) कर्मचारी के पद पर नौकरी प्राप्त कर ली थी। इस पद के लिए अधिकतम शैक्षणिक योग्यता केवल 10वीं पास निर्धारित थी। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द करते हुए बैंक द्वारा की गई कर्मचारी की बर्खास्तगी को पूरी तरह से सही ठहराया है। ​फैसले के प्रमुख बिंदु: ​अवसर की समानता : कोर्ट ने स्पष्ट किया कि...