छत्तीसगढ़: 22 जून से विद्युत संविदा कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन; प्रदेश में ब्लैकआउट का खतरा!
छत्तीसगढ़: 22 जून से विद्युत संविदा कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन; प्रदेश में ब्लैकआउट का खतरा!
अपनी लंबित मांगों, विशेषकर नियमितीकरण (Regularization) की मांग को लेकर संविदा कर्मचारियों ने 22 जून 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। इस हड़ताल के कारण प्रदेश में बिजली व्यवस्था चरमराने और ब्लैकआउट जैसी स्थिति उत्पन्न होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के अनुसार, राज्य में लगभग 2,500 संविदा कर्मचारी पिछले 8 से 10 वर्षों से कार्यरत हैं। संघ का आरोप है कि विभाग का पूरा दारोमदार इन्हीं कर्मचारियों के कंधों पर है, जो न केवल तकनीकी कार्य देख रहे हैं बल्कि विभाग की हर जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।
- नियमितीकरण का अभाव: वर्ष 2011 के बाद से किसी भी संविदा कर्मचारी को नियमित नहीं किया गया है।
- रिक्त पदों की उपलब्धता: विभाग में 5,000 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं, बावजूद इसके संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने में टाल-मटोल की जा रही है।
- कार्यबल का संकट: लगातार हो रहे रिटायरमेंट के कारण विभाग में अनुभवी कर्मचारियों की कमी है। वर्तमान में जो नियमित लाइनमैन कार्यरत हैं, उनमें से अधिकांश अपनी आयु के उस पड़ाव पर हैं जहाँ वे खंभों पर चढ़कर तकनीकी कार्य करने में सक्षम नहीं हैं।
संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा। 22 जून से क्षेत्रीय कार्यालय (Region-wise) स्तर पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया, तो कर्मचारी सामूहिक इस्तीफे जैसा कड़ा कदम उठाने के लिए भी बाध्य होंगे।
बिजली एक अति आवश्यक सेवा है, और ऐसे समय में जब मानसून दस्तक दे चुका है, संविदा कर्मचारियों का कार्य पर न होना छत्तीसगढ़ के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ब्लैकआउट का डर: बरसात के दिनों में तकनीकी खराबी और लाइन फॉल्ट की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में यदि विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं, तो प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली की आपूर्ति बाधित होने और बड़े स्तर पर ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो सकती है।
अब सबकी नजरें राज्य शासन और विद्युत विभाग के प्रबंधन पर टिकी हैं। क्या प्रशासन समय रहते इस संकट का समाधान निकाल पाएगा? या फिर प्रदेश की जनता को इस प्रशासनिक अनदेखी के कारण अंधेरे में रहने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?
विभाग द्वारा अब तक इस आंदोलन को लेकर कोई ठोस समाधान प्रस्तुत नहीं किया गया है। यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और शासन की होगी।

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