NK संगवारी जनता के गोठ एक्सक्लूसिव (रायपुर) विशेष खोजी रिपोर्ट: नीति बनी, प्रस्ताव पास हुआ... फिर भी छत्तीसगढ़ के बिजली संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण अधर में क्यों?
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रायपुर:छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के हजारों संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों से यह साफ हो गया है कि साल 2015 में ही संचालक मंडल (Board of Directors) की बैठक में नियम और प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद तकनीकी पेंच और कड़ी शर्तों के कारण कर्मचारियों का नियमितीकरण आज तक फाइलों में दबा हुआ है।
हमारी पड़ताल में और विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के महामंत्री कमलेश भारद्वाज जी ने विभाग के आंतरिक 'नोट फॉर बीओडी' (Note for BoD) के जरिए वे 3 बड़े कारण बताया हैं, जिन्होंने संविदा कर्मियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया:
1. बड़ा छलावा: नियमित नहीं, 'संविदा' के नए पदों को मिली थी मंजूरी
दस्तावेजों के मुताबिक, विभाग ने सीधे नियमितीकरण का रास्ता खोलने के बजाय एक नया प्रशासनिक मोड़ दिया था। प्रस्ताव के पैरा 6 में स्पष्ट लिखा गया था कि मैदानी दफ्तरों के लिए 2000 नए 'लाइन अटेंडेंट (संविदा)' के पद निर्मित किए जाएं। यानी शुरुआत से ही इन पदों का मूल ढांचा स्थायी (Permanent) न रखकर केवल कॉन्ट्रैक्ट आधारित रखा गया था।
2. 6 साल की कड़ी सेवा और रिक्त पदों का पेंच
के पैरा 9 में नियमितीकरण के लिए जो नीति बनाई गई थी, उसमें दो ऐसी शर्तें जोड़ी गईं जिन्हें पार करना कर्मचारियों के लिए बेहद जटिल बना दिया गया:
शर्त क: संविदा लाइन अटेंडेंट के रूप में कम से कम 6 वर्ष की निरंतर और संतोषजनक सेवा अवधि पूरी करना अनिवार्य होगा।
शर्त ख: यह समायोजन केवल तभी होगा जब संबंधित श्रेणी (Category) में स्थायी/नियमित पद रिक्त उपलब्ध होंगे।
3. बड़ा विरोधाभास: रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ीं लाइनें और उपभोक्ता, फिर भी नियुक्तियां स्थायी क्यों नहीं?
दस्तावेजों के आंकड़े बिजली कंपनी के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। साल 2000 में छत्तीसगढ़ गठन के समय से लेकर 2018 के बीच राज्य में बिजली नेटवर्क और उपभोक्ताओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई:
लाइनों की लंबाई: 33 KV और 11 KV लाइनों की लंबाई 47,544 किमी से बढ़कर 1,16,388 किमी हो गई।
ट्रांसफार्मर: वितरण ट्रांसफार्मरों की संख्या 29,692 से बढ़कर 1,39,437 तक पहुंच गई।
उपभोक्ता (Domestic Consumers): उपभोक्ताओं की संख्या 18.51 लाख से बढ़कर 48.89 लाख (लगभग 2.6 गुना) हो गई।
ब्यूरो की तीखी टिप्पणी: महामंत्री कमलेश भारद्वाज जी से खास बात चीत और उनकी प्रतिक्रिया
कमलेश भारद्वाव जी द्वारा बताया गया की उनके पास इसका नोट सीट है दस्तावेज़ खुद स्वीकार करते हैं कि कार्यभार 2.6 गुना बढ़ चुका है और आनुपातिक रूप से लाइन स्टाफ की संख्या 20,956 होनी चाहिए। इसके बावजूद, विभाग स्थायी पदों पर भर्ती करने या सेवारत संविदा कर्मियों को नियमित करने के बजाय केवल 2000 संविदा पदों के सहारे पूरी व्यवस्था खींच रहा है। लगातार लाइन और घरेलू उपभोक्ताओं में रिकॉर्ड वृद्धि होने के बाद भी बिजली विभाग इन कर्मचारियों को स्थायी सुरक्षा देने से कतरा रहा है।
ब्यूरो रिपोर्ट: NK संगवारी जनता के गोठ

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