NK संगवारी न्यूज़ एक्सक्लूसिव: संविदा लाइन परिचारकों का फूटा गुस्सा, आज करेंगे विद्युत मुख्यालय का घेराव,मांगें पूरी न होने पर 22 जून से पूरे प्रदेश की बिजली ठप करने की चेतावनी
रायपुर (डंगनिया मुख्यालय): छत्तीसगढ़ के बिजली विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले संविदा लाइन परिचारक आज अपने हक की लड़ाई के लिए सड़क पर उतर आए हैं। प्रदेश भर के संविदा कर्मचारी आज रायपुर के डंगनिया स्थित 'विद्युत सेवा भवन' मुख्यालय का घेराव कर एक दिवसीय 'गेट मीटिंग' कर रहे हैं। इस दौरान विभाग के आला प्रबंधन को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द नियमितीकरण की मांग की जाएगी।
📌 खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
22 जून से अनिश्चितकालीन आंदोलन: मांगें पूरी न होने पर मानसून की शुरुआत में ही बड़े स्तर पर हड़ताल की चेतावनी।
दोहरी नीति का आरोप: 2007, 2010 और 2011 के संविदा कर्मियों को 2 साल में नियमित किया गया, लेकिन 2016 और
2018 के कर्मचारियों के साथ अनदेखी।
बढ़ता हुआ खतरा: विपरीत परिस्थितियों में काम करने के कारण अब तक 40 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत, 100 से अधिक घायल।
रिक्त पदों का संकट: विभाग में वर्तमान में 5,000 से अधिक पद खाली, जिससे बढ़ा काम का बोझ।
⚡ "जब पहले हुआ नियमितीकरण, तो हमारे साथ सौतेला व्यवहार क्यों?"
NK संगवारी न्यूज़ से खास बातचीत करते हुए रायगढ़ क्षेत्र के अध्यक्ष नंद कुमार मरकाम ने विभाग के दोहरे रवैये पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा:
"विद्युत विभाग में इससे पहले साल 2007, 2010 और 2011 में भी संविदा पर लाइनमैनों की भर्ती हुई थी। उनके नियमों में भी नियमितीकरण का कोई रास्ता नहीं था, फिर भी सरकार और विभाग ने महज 2 साल के भीतर उन्हें परमानेंट किया। लेकिन साल 2016 और 2018 के संविदा कर्मचारियों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। विभाग हमें सिर्फ आश्वासन का 'लॉलीपॉप' थमा रहा है और हमारी जायज मांगों को दबाया जा रहा है।"
💔 जान जोखिम में डालकर काम कर रहे कर्मचारी: 40 की मौत, 100 से ज्यादा घायल
अध्यक्ष नंद कुमार मरकाम ने ग्राउंड जीरो की डरावनी हकीकत सामने रखते हुए बताया कि विभाग में वर्तमान में 5,000 से अधिक पद खाली पड़े हैं। बिजली उपभोक्ताओं (कंज्यूमरों) की संख्या और विद्युत क्षेत्र का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन नई भर्तियां या नियमितीकरण नहीं होने से पूरा बोझ संविदा कर्मियों पर डाल दिया गया है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन संविदा कर्मचारियों से उनकी कार्य प्रकृति के विपरीत जाकर काम कराया जा रहा है। नियम कहते हैं कि इनका काम सिर्फ मैदानी स्तर पर नियमित लाइनमैनों की 'सहायता (हेल्प)' करना है, लेकिन अधिकारी इनसे विपरीत और अत्यधिक जोखिम भरे कार्य करवा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि अब तक 40 से ज्यादा संविदा कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं और 100 से ज्यादा कर्मचारी गंभीर रूप से घायल होकर अपंगता का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद भी विभाग इन्हें नियमित करने को तैयार नहीं है।
🛑 महा-अल्टीमेटम: 22 जून से छत्तीसगढ़ में ब्लैकआउट की तैयारी!
लगातार मिल रहे आश्वासनों से नाराज कर्मचारियों ने अब आर-पार का मन बना लिया है। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि विद्युत विभाग ने उनकी मांगों पर तुरंत विचार नहीं किया, तो आगामी 22 जून से पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
NK संगवारी न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट: संविदा कर्मचारियों ने आंदोलन के लिए बहुत ही संवेदनशील समय चुना है। 22 जून के आस-पास छत्तीसगढ़ में मानसून (बरसात) दस्तक दे चुका होता है। आंधी-तूफान और भारी बारिश के मौसम में यदि ये 5,000 से अधिक संविदा कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते हैं, तो पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है। आंधी में टूटे तार और बंद पड़े ट्रांसफार्मर को सुधारने वाला कोई नहीं होगा, जिससे पूरा छत्तीसगढ़ अंधेरे में डूब सकता है। अब देखना यह होगा कि विद्युत प्रबंधन इस बड़ी चेतावनी के बाद क्या कदम उठाता है।
जोहार छत्तीसगढ़, अपन आवाज़!
ब्यूरो रिपोर्ट: NK संगवारी न्यूज़, रायपुर-कोरबा।


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