बड़ी ख़बर: कागज़ पर साहब, खंभे पर संविदा; सिर्फ और सिर्फ 'संविदा कर्मचारियों' के भरोसे रेंग रहा छत्तीसगढ़ का बिजली विभाग! विभागीय लापरवाही का महा-खुलासा: बिना किसी जिम्मेदार नियमित लाइनमैन या तकनीकी अधिकारी की मौजूदगी के कराया जा रहा है मौत का खेल; नियमों को ताक पर रख, संविदा कर्मियों की जान से खेल रहा CSPDCL प्रबंधन।
विशेष खोजी रिपोर्ट (By NK संगवारी न्यूज़ टीम)
छत्तीसगढ़:
छत्तीसगढ़ को रोशन करने वाला बिजली विभाग (CSPDCL) इन दिनों खुद घोर प्रशासनिक अंधकार और लापरवाही के दौर से गुजर रहा है। 'NK संगवारी न्यूज़' के पास मौजूद पुख्ता जमीनी इनपुट्स और दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राज्य की पूरी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था अब केवल और केवल संविदा कर्मचारियों के भरोसे बैसाखी पर टिक गई है। सबसे खतरनाक बात यह है कि मैदानी स्तर पर 11KV से लेकर 33KV जैसी हाई-वोल्टेज लाइनों के फाल्ट सुधारने और मेंटेनेंस का काम बिना किसी जिम्मेदार नियमित (स्थायी) कर्मचारी या विभागीय अधिकारी की मौजूदगी के, पूरी तरह संविदा कर्मियों के सिर मढ़ दिया गया है।
🔴 नियम केवल कागजों पर, मैदान में 'मौत का कुआं'
विद्युत सुरक्षा नियमों और श्रम कानूनों (Labor Laws) के मुताबिक, जब भी कोई संविदा या ठेका कर्मचारी पोल या ट्रांसफार्मर पर चढ़ता है, तो मौके पर एक परमानेंट सरकारी लाइनमैन, लाइन सुपरवाइजर या कनिष्ठ अभियंता (JE) का उपस्थित होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। उनकी सीधी देखरेख में ही 'सुरक्षा शटडाउन' (Line Shutdown) लिया जाना चाहिए और अर्थिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि करंट लगने का 1% भी खतरा न रहे।
लेकिन 'NK संगवारी न्यूज़' की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि यह नियम सिर्फ फाइलों की शोभा बढ़ा रहा है। हकीकत में, नियमित कर्मचारी और अधिकारी सब-स्टेशनों और दफ्तरों में बैठकर केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं, जबकि 8 से 10 साल का लंबा अनुभव रखने वाले संविदा कर्मचारियों को अकेले ही जान हथेली पर रखकर खंभों पर भेज दिया जाता है।
🔴 रिक्त पदों का खेल और बढ़ता 'कम्युनिकेशन गैप'
विभागीय सूत्रों के अनुसार, बिजली विभाग में पिछले कई सालों से नियमित मैदानी अमले (लाइनमैन, परिचालक) की भारी कमी है। हर महीने कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नई नियमित भर्तियां ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। अपनी इस भयंकर नाकामी और मैनपावर की कमी को छिपाने के लिए प्रबंधन ने पूरा बोझ संविदा कर्मचारियों पर डाल दिया है।
बिना किसी जिम्मेदार स्थायी स्टाफ के मौके पर काम होने के कारण मैदानी स्तर पर भयंकर 'कम्युनिकेशन गैप' (तालमेल की कमी) हो रहा है। कई बार संविदा कर्मी ऊपर लाइन पर काम कर रहा होता है और पीछे सब-स्टेशन से बिना सही सूचना के लाइन चालू (Back-feed) कर दी जाती है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में संविदा कर्मियों के साथ होने वाले जानलेवा हादसों और अपंगता का ग्राफ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। सबसे बड़ा दर्द यह है कि दुर्घटना होने पर इन संविदा परिवारों को न तो कोई बड़ी सामाजिक सुरक्षा मिलती है और न ही अनुकंपा नियुक्ति का कोई ठोस प्रावधान है।
🔴 NK संगवारी न्यूज़ का सीधा सवाल:
8 से 10 वर्षों से विभाग की रीढ़ बने इन संविदा कर्मचारियों के दम पर अगर छत्तीसगढ़ का बिजली विभाग चल रहा है, तो शासन-प्रशासन इन्हें इनका हक देने में पीछे क्यों है?
सवाल नंबर 1: जब फाल्ट से लेकर मेंटेनेंस और पूरी सप्लाई का असली और जोखिम भरा काम संविदा कर्मी कर रहे हैं, तो 'समान कार्य-समान वेतन' का लाभ उन्हें क्यों नहीं मिल रहा?
सवाल नंबर 2: बिना किसी नियमित जिम्मेदार कर्मचारी के संविदा कर्मियों को जोखिम वाली जगहों पर अकेले भेजना क्या सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन और आपराधिक लापरवाही नहीं है?
सवाल नंबर 3: विभाग का पूरा ढांचा संभालने वाले इन अनुभवी हाथों को सीधे नियमित (Regularise) करने में सरकार को क्या गुरेज है?
निष्कर्ष:
'NK संगवारी न्यूज़' बिजली कंपनी के उच्च प्रबंधन और ऊर्जा मंत्रालय से यह मांग करता है कि मैदानी स्तर पर हो रहे इस मौत के खेल को तुरंत रोका जाए। यदि जल्द ही संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा तय नहीं की गई और उन्हें विभागीय सेटअप में नियमित कर जिम्मेदारी तय नहीं की गई, तो यह लापरवाही किसी दिन छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ठप कर देगी।
- ब्यूरो रिपोर्ट, NK संगवारी न्यूज़, छत्तीसगढ़।

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